Tuesday, January 8, 2008

परिचय

छी छी गलियां?? ये कैसा ब्लोग बना डाला ?? कितना गन्दा हैं इसे पढ़ना... आप में से कुछ शायद ऐसा ही कहें,, कुछेक लोग गालियाँ भी दें कि साले कैसे कैसे लोग आ जाते हैं॥ पूरे चिटठा जगत को बर्बाद करने... पर दोस्तो यह हकीकत हैं...सबसे ज्याद आज की कड़वाहट से भरी जिन्दगी में अगर किसी चिह का इस्तेमाल करते हैं तो वो यही हैं॥ और इसीलिए मुझे लगता हैं कि अंतर्जाल की दुनिया में १ ब्लोग इन गालियों को भी समर्पित होना चाहिऐ॥ ये गलियां वही शब्द हैं जो बाहर निकलकर हमारी कड़वाहट को कम कर डालते हैं...इनके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं पर यह तो उसके इस्तेमाल पर निर्भर करता हैं...बिल्कुल दुसरे अन्य चीजो की तरह... ऐसा भी नही कि आपके बच्चे इसे पढ़कर बिगड़ जाएँ... याद कीजिए, हमने कभी भी इन्हें सिलेबस की किताबो मी नही पढ़... ये ऐसे भी शब्द नही जिन्हें हमारे माता पिता ने सिखलाया हो॥ हिन्दी भाषा के इतिहास में शायद गालियाँ पिधियाँ दर पिधियाँ मौखिक परंपरा का ही निर्वहन करती आई हैं...अंत मी हम देखेंगे कि लगभग सभी गालियाँ किसी १ लिंग को ही लक्ष्य करके बनायीं हैं॥ खैर आइये हम अपनी भड़ास यहाँ निकाले॥ किसी और को देने से बेहतर हैं कि हम यह सभी के साथ मिल बांटे ...

आइये आप भी अपना योगदान दें...आपने अक्सर गलियां दी होंगी॥ कितने भी कायर या "सभ्य" हों मन मी गालियाँ देने से आपको कोई नही रोक सकता... नही तो फिर आपने कहीं सुनी होंगी... अपने जीवन के बेहतरीन या अद्भुत गालियों को हामरे पास लिख भेजे... पता हैं॥ jeetujnu@gmail.com

11 comments:

Das Übermench said...

very innovative effort. I am sure it will bring some very interesting and positive things out of this. Its an unexplored field and things must be done very carefully. All the best to this blogs team

rakesh kumar meena said...

hi
mahan chat jeetu ko krantikari chat sallam
lagata hai bahut frustrare ho gaya hai .
by the way its really interesting to know a marxist approach to gaali. gaalis are the common property of mankind . they r used to expose anger .but in western india people use galis very commonly to call their friends and to enjoy. some gallies r used by female equally .make more wide observation of gallies prevailedd in different language speaking peoples .try to make an psycho-philosophical analysis on the basis of sex ,class and culture of the givers .
some gallies used in jnu r -pseudo leftist ,lumpen .communal, fascist, Hippocrates ,opportunist, barasati medhak .chat,badachat, bhayakar chat, khaki nekar ,bhagava chaddi ,anjuman-member ,savarkar ki aulad ,advani ke bacce,.........comrade ,marx ka bacca et
all d best
jnu chat parampara long live
i hope ur research will be milestone for most radical left researcher
what the jnu think today india think tomorrow.

सोनू उपाध्‍याय said...

दोस्‍त बहुत हंस रहा हूं। और मुझे पता है मैं बाहर जाकर ,अपने दोस्‍तों को बताकर काफी देर तक हसूंगा। खैर अच्‍छा प्रयास है। गालियां चंद उत्‍तेजनाओं और गुस्‍से को निकालने के लिए शब्‍दों का गुच्‍छा भर है। असली बात तो भाव की है। मुझे आपका भाव पसंद आया। गाली से कुछ नहीं होता भाव ही असल बात है। बहरहाल,चूतिया बनाने के लिए धन्‍यवाद दोस्‍त।

Prashant (Hindi_Premi) said...

Samman Sab ka karna chhiye. Veshya ka bhi

विक्षुब्ध said...

बढ़िया विषय चुना ! और प्रतिक्रियाएँ भी खूब आ रही हैं...( कान से कान तक की मुस्कराहट का अनुभव बहुत दिनों बाद हुआ ) !

इसी बहने कुछ तजिंदर , अनिल और बमबम बिहारी जैसे लोगों की कुछ भडास तो निकल ही पा रही है।
मनोविज्ञान से व्यावहारिकता तक आते आते बहुत कुछ अश्लील से श्लील और वाइस वारसा हो जाता है ....!

खैर ... लगे रहो !
साधुवाद!!!

प्रदीप सुरीन said...

भाई, हो सकता है मैंने शायद काफी देर से ये ब्लॉग देखा. पर यकीन मानो शुरुआत अच्छी है. आखिर क्यों नहीं एक ब्लॉग गालियों पर भी समर्पित हो? तुम ज़रूर लिखो इस मुद्दे पर. हम भी अपने विचार समय समय पर भेजते रहेंगे....

alok pandey said...

MADARCHOCH AUR BAHANCHOCH JAISE GALIYA BAHUT PURANI HO CHUKI HAIN. AB TO GIRLS KO BARABARI KE LIYE KAHNA CHHAHEIY --------- FATHAECHOCH ABU BABACHOCH

rose said...

बहुत हंस रही हूं। और मैं बाहर जाकर ,अपने दोस्‍तों को बताने वाली हुं.. और ज्यादा देर तक हसूंगी आंखो से पानी निकल आया..। मेने तो इसको लींक अपने दोस्तों को भी भेजा. ये पहली बार है जब मैंने गालिंया सुनी या पढी.. तब पता चला की दुनिया कितनी आगे निकल चुकी है... अजिब लगा पर पढनें में मजा आया..
पर इस गाली-शाला में मैं अपना योगदान नहीं दे पाउंगी.. sorry.

ravi said...

वाह भाई दमदार हो यार मजा आ गया...

जयराम "विप्लव" said...

hey , lekhak mahoday . nishchay hi aapne jnu ka naam raushan kiya hai . aakhir jis university mein aap jaise uchhch koti ke log rahte hon , jinki itni behtarin mimansha ho usse yahi ummid kee jaati hai .

waise gaali to hamare bihari mein aisi aisi hai ki aap sunkar behos ho jayenge par yahan sarwjanik kar main aapki barabri karne ki himakat nhi kar sakta . jara yah post apni maa aur sagi bahan ko v padhwayen to aapki mahanta aur bhi badhegi /

Mayank said...

बहुत बदिया प्रयास,

पर ज्यादातर लोग इसे संकीर्ण अर्थों में ले रहे हैं.

सिर्फ अपनी कुंठा व्यक्त करते हुए अपने मानसिक पिछडेपन को उजागर करते ये लोग कम से कम मनोरंजन तो कर रहे हैं...

मेरा कमेन्ट: बहुत बढिया, लीक से हटकर...